मन्डी

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व्‍यास नदी के किनारे बसा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर मंडी लंबे समय से व्‍यवसायिक गतिविधियों का केन्‍द्र रहा है। समुद्र तल से 760 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह नगर हिमाचल के तेजी से विकसित होते शहरों में एक है। कहा जाता है महान संत मांडव ने यहां तपस्‍या की और उनके पास अलौकिक शक्तियां थी। साथ ही उन्‍हें अनेक ग्रन्‍थों का ज्ञान था। माना जाता है कि वे कोल्‍सरा नामक पत्‍थर पर बैठकर व्‍यास नदी के पश्चिमी तट पर बैठकर तपस्‍या किया करते थे। यह नगर अपने 81 ओल्‍ड स्‍टोन मंदिरों और उनमें की गई शानदार नक्‍कासियों के लिए के प्रसिद्ध है। मंदिरों की बहुलता के कारण ही इसे पहाड़ों के वाराणसी नाम से भी जाना जाता है। मंडी नाम संस्‍कृत शब्‍द मंडोइका से बना है जिसका अर्थ होता है खुला क्षेत्र।


क्‍या देखें[बदलें]

रेवलसर झील- मंडी से 25 किमी. की दूरी पर स्थित रेवलसर झील अपने बहते रीड के द्वीपों के लिए लो‍कप्रिय हैं। कहा जाता है कि इनमें से सात द्वीप हवा और प्रार्थना से हिलते हैं। प्रार्थना के लिए यहां एक बौद्ध मठ, हिन्‍दु मंदिर और एक सिख गुरूद्वारा बना हुआ है। इन तीनों धार्मिक संगठनों की ओर से यहां नौकायन की सुविधा मुहैया कराई जाती है। इसी स्‍थान पर बौद्ध शिक्षक पदम संभव ने अपने एक मिशनरी को धर्मोपदेश देने के लिए नियुक्‍त किया था।

त्रिलोकनाथ शिव मंदिर- नागरी शैली में बने इस मंदिर की छत टाइलनुमा है। यहां से आसपास के सुंदर नजारे देखे जा सकते हैं। मंदिर से नदी और आसपास के क्षेत्रों का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। यहां भगवान शिव को तीनों लोकों के भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। मंदिर में स्थित भगवान शिव की मूर्ति पंचानन है जो उनके पांच रूपों को दिखाती है।

भूतनाथ मंदिर- मंडी के बीवों बीच स्थित इस मंदिर का निर्माण 1520 में किया गया था। यह मंदिर उतना ही पुराना है जितना कि यह शहर। मंदिर में स्‍थापित नंदी बैल की प्रतिमा बुर्ज की ओर देखती प्रतीत होती हे। पास ही बना नया मंदिर खूबसूरती से बनाया गया है। मार्च के महीने में यहां शिवरात्रि का उत्‍सव मनाया जाता है जिसका केंद्र भूतनाथ मंदिर होता है।

श्‍यामकली मंदिर- तर्ना पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को तर्ना देवी मंदिर भी कहा जाता है। राजा श्‍याम सेन ने 17वीं शताब्‍दी में इस मंदिर का निर्माण कराया था। अपने वारिस के पैदा होने की खुशी में देवी को धन्‍यवाद देने के लिए उन्‍होंने यह मंदिर बनवाया। भगवान शिव की पत्‍नी सती को समर्पित इस मंदिर का पौराणिक महत्‍व है।

सुंदरनगर- मंडी से 26 किमी. दूर सुंदरनगर अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खूबसूरत हरीभरी घ‍ाटियों के इस क्षेत्र में ऊंचें ऊंचें पेड़ों की छाया में चलना बहुत की सुखद अनुभव होता है। पहाड़ी के ऊपर सुखदेव वाटिका और महामाया का मंदिर है जहां प्रतिवर्ष हजारों भक्‍त आते हैं। एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रो इलैक्ट्रिक प्रोजेक्‍ट सुंदरनगर का ही हिस्‍सा है।

जंझेली- मंडी से 67 किमी.दूर जंझेली हाइकर्स का स्‍वर्ग कहलाता है। 32 किमी. गाड़ी में आने के बाद गोहर से आगे का रास्‍ता पैदल तय करना पड़ता है। घने जंगलों के बीच स्थित बजही में रेस्‍ट हाउस की भी व्‍यवस्‍था। यहां आराम करके जंझेली तक 20 किमी. की चढ़ाई करनी पड़ती है।

अर्द्धनारीश्‍वर मंदिर- सातवीं शताब्‍दी में बना यह मंदिर स्‍थापत्‍य कला का बेजोड नमूना है। भगवान शिव की सुंदर प्रतिमा यहां स्‍थापित है। प्रतिमा आधे पुरूष और आधी महिला के रूप में है, जो एक दर्शाती है नारी और पुरूष दोनों को अस्तित्‍व एक दूसरे पर निर्भर है।

तत्‍ता पानी- तत्‍ता पानी का मतलब गर्म पानी होता है। चारों ओर पहाड़ों से घिरा तत्‍ता पानी यह सतलुज नदी के सतलुज नदी के दायें तट पर स्थित है। जिस घाटी पर यह स्थित है वह बेहद खूबसूरत है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 656 मीटर है। प्राकृतिक सल्‍फर युक्‍त इसका पानी बहुत शुद्ध और अलौकिक शक्तियों से युक्‍त माना जाता है। कहा जाता है कि इसके पानी से बहुत-से राजाओं के शरीर के रोग ठीक हो गए थे। सतलुज नदी के जल में उतार-चढ़ाव के साथ्‍ा इसके जल में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

बरोट- बरोट एक शानदार पिकनिक स्‍थल के रूप में लोकप्रिय है। मंडी से 33 किमी. दूर मंडी-पठानकोट हाइवे पर यह स्थित है। यहां का रोपवे और फिशिंग की सुविधाएं पर्यटकों को काफी आकर्षिक करती हैं।

शिखर देवी मंदिर- समुद्र तल से 3332 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर मानवीय शोर-शराबे एक एकदम मुक्‍त है। सूर्योदय और सूर्यास्‍त के मनमोहक नजारे यहां से बहुत ही सुंदर दिखाई देते हैं। करसोग, बकरोट और गोहर से होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।

प्रशर- प्रशर झील मंडी से 40 किमी. दूर उत्‍तर दिशा में स्थित है। इसकी लोकप्रियता का कारण यहां बना एक तिमंजिला मंदिर है। पैगोडा शैली में बना यह मंदिर संत प्रशर को समर्पित है।


कैसे जाएं[बदलें]

वायु मार्ग- हिमाचल प्रदेश का भुंटार एयरपोर्ट मंडी का निकटतम एयरपोर्ट है। मंडी से इस एयरपोर्ट की दूरी लगभग 63 किमी.है।

रेल मार्ग- मंडी का निकटतम रेलवे स्‍टेशन कीरतपुर में है जो यहां से 125 किमी. की दूरी पर है।

सडक मार्ग- सडक मार्ग से चंडीगढ़, पठानकोट, शिमला, कुल्‍लू, मनाली और दिल्‍ली से मंडी पहुंचा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अनेक बसें मनाली, कुल्‍लू, चंडीगढ़, शिमला और दिल्‍ली से मंडी के लिए चलती हैं।

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